Description:

रवींद्रनाथ टैगोर ने 1930 में सोवियत संघ की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान वे सोवियत संघ द्वारा जनसाधारण के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयत्नों से बहुत प्रभावित हुए। साथ ही, वहाँ के अधिनायकवाद से उन्हें चिंता हुई। अपने इन्हीं अनुभवों और विचारों को उन्होंने अपने मित्रों और संबंधियों को लिखे पत्रों में व्यक्त किया। इन पत्रों का संग्रह बांग्ला में प्रकाशित हुआ, पर उसके अंग्रेजी अनुवाद ' लेटर्स फ्रॉम रशिया ' को प्रकाशित करने की अनुमति ब्रिटिश सरकार ने नहीं दी। बाद में इस पुस्तक का रूसी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ। इसमें उन अंशों को छोड़ दिया गया था, जिनमें तत्कालीन रूस में चल रहे डिक्टेटरशिप की आलोचना थी।